मकर संक्रांति : सूर्य, संस्कार और संकल्प का पर्व
तिल-तिल करके आगे बढ़ने का संकल्प भारत एक ऐसा देश है जहाँ हर पर्व केवल उत्सव नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाला संदेश होता है। मकर संक्रांति भी ऐसा ही एक पावन पर्व है, जो हमें प्रकृति, परिश्रम और सकारात्मक सोच से जुड़ना सिखाता है। यह पर्व हर वर्ष 14 जनवरी के आसपास मनाया जाता है और पूरे देश में अलग-अलग नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है। सूर्य के उत्तरायण होने का पर्व मकर संक्रांति का सबसे बड़ा महत्व यह है कि इस दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण होते हैं। शास्त्रों में उत्तरायण को शुभ काल माना गया है। मान्यता है कि इस समय किया गया पुण्य कार्य कई गुना फल देता है। दिन बड़े होने लगते हैं, ठंड धीरे-धीरे कम होती है और प्रकृति में नई ऊर्जा का संचार होता है। यह परिवर्तन हमें भी सिखाता है कि जीवन में अंधकार कितना भी गहरा क्यों न हो, प्रकाश की ओर बढ़ना ही सच्चा मार्ग है। कृषि और किसानों से जुड़ा पर्व मकर संक्रांति का गहरा संबंध कृषि जीवन से है। इस समय रबी की फसल खेतों में लहलहाने लगती है। किसान अपनी मेहनत का फल देखकर आनंदित होते हैं। इसलिए यह पर्व कृतज्ञत...