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गीता और जीवन प्रबंधन,गीता क्यों पढ़नी चाहिए

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श्रीमद्भगवद्गीता: जीवन, धर्म और नेतृत्व का कालजयी ग्रंथ   विश्व के सबसे प्राचीन ज्ञानग्रंथों में एक, श्रीमद्भगवद्गीता , भारतीय संस्कृति, दर्शन और जीवनशैली का ऐसा आधार है, जिसने न केवल धार्मिक दृष्टि से मानवता को दिशा दी बल्कि आधुनिक जीवन-प्रबंधन तक को नई परिभाषा प्रदान की। आज जब समय तेजी से बदल रहा है, मूल्य कमजोर होते जा रहे हैं और मनुष्य की सोच कई दिशाओं में बिखर रही है, ऐसे समय में गीता केवल एक शास्त्र नहीं बल्कि जीवन का स्थायी आधार बनकर सामने आती है। कुरुक्षेत्र से लेकर आधुनिक समाज तक—गीता की प्रासंगिकता गीता का जन्म उस क्षण हुआ, जब धर्म-अधर्म, कर्तव्य-मोह और निर्णय-अनिर्णय आमने-सामने खड़े थे। अर्जुन का भ्रम वास्तव में हर मनुष्य का भ्रम है— “क्या करूं?”, “कैसे करूं?”, “क्या यह सही है?”, “क्या मैं असफल हो जाऊंगा?”, “समय मेरे साथ है या नहीं?” भगवान कृष्ण ने अर्जुन को जो संदेश दिया, वह 5000 वर्ष बाद भी उतना ही मूल्यवान है, क्योंकि मनुष्य की मानसिक संरचना और समस्याएँ आज भी वही हैं— तनाव, भ्रम, भय, परिणाम का दबाव और सामाजिक अपेक्षाएँ। गीता का मूल आधार: कर्म, ज्ञान और भक्ति का अ...