Posts

आगे बढ़ने के लिए हमें बहरा बनना पड़ेगा | प्रेरणादायक हिंदी कहानी

Image
 मेहनत, निरंतरता और आत्मविश्वास का महत्व   सफलता के रास्ते में नकारात्मक आवाज़ें यदि जीवन में कामयाब होना है तो हमे कई कठिनाइयों का  सामना करना पड़ेगा हमें समस्याओं से  डर कर नहीं बल्कि समस्याओं का डटकर मुकाबला करना होगा. हमें छोटी मोटी समस्याओं से   घबराकर अपने कृत्य पथ से विमुख नहीं होना  है।  हमें निरन्तर अपने कार्य को गति देना होगी। तभी आगे जाकर सफलता प्राप्त हो पाएगी। कोन क्या कह रहा है ?  क्या नहीं कर रहा ? इन शब्दों पर हमें ध्यान नहीं देना है , ये वही लोग है , जो आज आपको हँसी का पात्र मान रहे हे। लेकिन  जब आप कामयाब हो जाओगे   तो वही लोग जो आपकी आलोचना कर रहे थे , आपको बदनाम कर रहे थे | आपकी तारीफ करेंगे और कहेंगे हमे तो मालूम था। आप सफल हो जाओगें।  संसार का नियम है , लोग उगते सूर्य को नमस्कार करते हैं,  ढलते दिन को नहीं । तुम अपनी खूबियां ढूडते जाओ , खामीया निकालने के लिए तो लाखों लोग मिलते जाएगें। क्योंकि यह काम वही लोग करेंगे जिनका कोई वजूद नहीं है।  जिस कार्य को करने के लिए आपने कदम उठाया है , उसको असफल क...

महात्मा बुद्ध: शांति और अहिंसा के अग्रदूत | Gautam Buddha Biography Hindi

Image
भारत की पावन भूमि पर अवतरित हुए करुणा और ज्ञान के प्रतीक महात्मा बुद्ध भारत भूमि को देवों और महापुरुषों की धरती कहा जाता है। इस पवित्र भूमि पर अनेक सत्यवादी, त्यागी और महान आत्माओं ने जन्म लेकर मानवता को दिशा दी। इसी तपोभूमि में महात्मा गौतम बुद्ध का अवतरण हुआ, जिन्होंने संसार को शांति, अहिंसा और करुणा का मार्ग दिखाया। जब महात्मा बुद्ध का जन्म हुआ, उस समय भारत अशांति, हिंसा, अंधविश्वास और कुरीतियों से ग्रस्त था। ऐसे दौर में बुद्ध का आगमन एक युग परिवर्तन लेकर आया। महात्मा बुद्ध का जन्म और बचपन महात्मा बुद्ध का बचपन का नाम सिद्धार्थ था। उनका जन्म 569 ईसा पूर्व में लुंबिनी (वर्तमान नेपाल) में हुआ। वे क्षत्रिय कुल के राजा शुद्धोदन के पुत्र थे। उनकी माता का नाम महारानी महामाया था, जिनका निधन पुत्र जन्म के सात दिन बाद हो गया। सिद्धार्थ का पालन-पोषण उनकी मौसी गौतमी ने किया। ज्योतिषियों ने भविष्यवाणी की थी कि यह बालक या तो चक्रवर्ती सम्राट बनेगा या फिर महान संत । यह सुनकर राजा शुद्धोदन चिंतित हो गए और उन्होंने सिद्धार्थ को सांसारिक सुखों में बांधे रखने का प्रयास किया। वैराग्...

श्री कागभुशुण्डिगुरु (लोमश ऋषि) कृतं रुद्राष्टकम्

Image
    श्री शिव रुद्राष्टकम पाठ का महत्व   शास्त्रों में शिव रुद्राष्टकम पाठ का महत्व बताया गया है. शिव रुद्राष्टकम भगवान शिव के रूप व शक्तियों पर आधारित हैं. भगवान श्रीराम ने भी रावण जैसे शत्रु पर विजय प्राप्त करने के लिए शिव रूद्राष्टकम स्तुति का पाठ किया था. परिणाम स्वरूप श्रीराम ने रावण का वध कर लंका पर विजय प्राप्त की. शिव रुद्राष्टकम पाठ के जाप  से   काकभुशुण्डि जी  शाप मुक्त हुए  थे  रामायण के उत्तरकांड में इसका व्याख्यान  हे  | . शिव रुद्राष्टकम पाठ के जाप  से   बड़े से बड़े शत्रु पर भी विजय प्राप्त की जा सकती है| भगवन आसुतोष  शिव सभी मनोकामनाए  पूरी करते है |  अर्थ, महत्व और पाठ से मिलने वाले फल 🔱 रुद्राष्टकम् का परिचय रुद्राष्टकम् भगवान शिव की अत्यंत प्रभावशाली स्तुति है, जिसकी रचना श्री कागभुशुण्डिगुरु (लोमश ऋषि) ने की थी। यह स्तोत्र आठ श्लोकों में भगवान शिव के निर्गुण, निराकार, करुणामय और सर्वशक्तिमान स्वरूप का वर्णन करता है। शास्त्रों के अनुसार, भगवान श्रीराम ने भी रावण जैसे महाबली शत्रु पर ...